मोहनी मोहन सों रसखानि
Raskhan Ratnavali — श्री रसखान
Verse 36 of 39
श्याम सघन घन घेरि के, रस बरस्यो रसखानि।
भई दिवानी पान करि, प्रेम मद्य मनमानि॥
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
घने घनों से घिरे हैं श्याम, रस की खान से बरसता है रस। भई दिवानी पान करि, प्रेम मदया मनमानी.. - श्री रसखान, रसखान रत्नावली