मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 5 of 39

भूत छिये मदिरा पिये, सब काहु सुद्धि होय। प्रेम सुधा रस जो पिये, तेहि सुद्धि कबहु न होय॥ - श्री रसखान, रसखान रत्नावली भूत-प्रेत पियें, सब पवित्र हो जायें। जो प्रेम का मधुर रस पीएगा, वह पवित्र नहीं होगा.. - श्री रसखान, रसखान रत्नावली
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि