मोहनी मोहन सों रसखानि

Raskhan Ratnavali — श्री रसखान

Verse 6 of 39

बिमल सरल रसखानि मिलि, भई सकल रसखानि। सोई नव रसखानि कों, चित चातक रसखानि॥ - श्री रसखान, रसखान रत्नावली बिमल सरल रसखानि मिलि, भाई सकल रसखानि। Soi Nav Raskhani Kon, Chit Chatak Raskhani.. - Shri Raskhan, Raskhan Ratnavali
मोहनी मोहन सों रसखानिमोहनी मोहन सों रसखानि