लाल की अँखियाँ रूप लुभानी

Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि

Verse 10 of 19

(राग रामकली) लाल की अँखियाँ रूप लुभानी। आठों जाम पिवत ही बीते, तऊ तृपति नहीं मानी॥ [1] लखि लखि नयन चयन नहिं पावैं, चाहत हियें समानी। अलबेली अलि रूप तरंगनी, पिय मन मीन रहानी॥ [2] - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (41) (राग रामकली) लाल की आँखों का सौंदर्य। पूरे आठ घंटे पहाड़ों में बीते, लेकिन कोई त्रिपाठी नहीं था। [1] लाखों आँखें चुन न सकीं, मुझे कोई चाहिए। अलबेली अली रूप तरंगनी, पिया मन मिन रहनी.. [2] - श्री अलबेली अली, समय प्रबंधन (41)
लटकत आावत बाहाँ जोरीलटकत आावत बाहाँ जोरी