लटकत आावत बाहाँ जोरी

Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि

Verse 11 of 19

लटकत आावत बाहाँ जोरी। फूले फूले दोउ जन सुन्दर, देखत बन घन खोरी॥ [1] फूलन की माला उर पहिरें, नवल स्याम नव गोरी। अलबेली अलि प्रानरवन दिन, अविचल भूतल जोरी॥ [2] - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (186) लटकत आवत बाहन जोरी। ये दो लोग सुन्दर हैं, सुन्दर लगते हैं.. [1] फूलों की माला पहनाओ, रंग नये हैं, रंग नये हैं। अलबेली अली प्रेरणावन दीन, निश्चित सतह जोरि.. [2] - श्री अलबेली अली, समय प्रबंधन (186)
लाल की अँखियाँ रूप लुभानीलटकत आावत बाहाँ जोरी