रुनकि-झुनकि आवति कुंजनि तैं
Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि
Verse 19 of 19
(राग विभास)
रुनकि-झुनकि आवति कुंजनि तैं, ठटकि-ठटकि पद धरति नवेली । [1]
झुकि-झुकि चलत सघन बीथिन पिय, निरुवारत कल कुसुमन बेली॥[2]
लटकि-लटकि नव नीलाम्बर बर, जाति सँमारति संग सहेली। [3]
पीक कपोल लोल दृग राते, रमि रहि नैननि छवि अलबेली॥ [4]
- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (82)
(राग विभास) रुनकी-झुनकी अवति कुंजनि तैं, ठटकी-ठटकी पद धरती नवेली। [1] झुकी-झुकी चलत गनन बिथिन पिया, निरुवरत कल कुसुमन बेली.. [2] लटकी-झुकी नव नीलांबर बर, सखियों संग जाति-चेतना। [3] चित्रा कपोल लोल दृघ डार, रामी रही नैनी छवि अलबेली.. [4] - श्री अलबेली अली, समय प्रबंधन (82)