लटकत आावत बाहाँ जोरी
Samay Prabandha — श्री अलबेली अलि
Verse 18 of 19
रूप में अटके री नैना मेरे।
तेरेइ रँग रंगे निस बासर, भये मोल के चेरे॥ [1]
पलक ओट कोटिक जुग मानत, बीतत कलप घनेरे।
अलबेली अलि हँसि चितवत जब जिवाएँ तेरे॥ [2]
- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (138)
वह सुन्दर आदमी आया और मेरी ओर देखा। तेरे रंग हमेशा छाए रहते हैं, मेरी आँखों में डर भरा रहता है.. [1] मेरे जीवन का हर पल खुशियों से भरा होता है, मेरा जीवन विचारों से भरा होता है। अलबेली अली हंसी चितावत जब जीवन तेरे.. [2] - श्री अलबेली अली, समय प्रबंधन (138)