राजति नव निकुंज नव जोरी

Saras Dev Vani — श्री सरस देव

Verse 3 of 5

(राग परज) राजति नव निकुंज नव जोरी। [1] सुंदर स्याम रसीले अंग अंग नवल कुंवर तन गोरी॥ [2] वदन माधुरी मदन सदन सुख सागर नागरि कुंवरि किसोरी। [3] सरसदेव नैंननि सचुपावत कौतिक निपट नयोरी॥ [4] - श्री सरसदेव जी, श्री सरस देव जू की बानी (29) (राग परजा) राजति नव निकुंज नव जोरी। [1] सुंदर स्याम, रसीले अंग, ताजा कुंआरी देह, गोरा बदन.. [2] वदन माधुरी मदन सदन, सुख सागर नगर, कुंआरी कन्या। [3] सरसदेव नैननानि सचुपवत कौतिक निपट न्योरि.. [4] - श्री सरसदेव जी, श्री सरस देव जू की बानी (29)
जुग मुख छवि बरनीराजति नव निकुंज नव जोरी