बाँकी पाग चन्द्रिका तापर तुर्रा रुरकि रहा है
Saras Sagara —
Verse 1 of 6
(सवैया)
बाँकी पाग, चन्द्रिका, तापर तुर्रा रुरकि रहा है।
वर सिरपंच, माल उर बांकी, पट की चटक अहा है॥ [1]
बाँके नैन, मैन-सर बाँके, बैन-विनोद महा है।
बाँके की बाँकी झाँकी करि, बाकी रही कहा है॥ [2]
- श्री सहचरीशरण देव, सरसमंजावली (29)
(सवैया) शेष चरण चन्द्रिका, तपर तुर्रा रूड़की चल रही है। वर सिरापंच, माल उर बांकी, पट की चाट आहा है.. [1] बनके नैन, मैना-सर बनके, बैना-विनोद महा है। बाँके की झलक अभी बाकी है, अब कहाँ बाकी है.. [2] - श्री सहचरीशरण देव, सरसमांजावली (29)