श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना
Saras Sagara —
Verse 6 of 6
(राग विलावल)
श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना।
नाना रूप रंग अंग अंग प्रति, अति रस रसिक सलौना॥ [1]
अति आसक्त रहत जु छबीली, छैल छबीले सों तन मन रौना।
सरस लाडिली लाल ख्याल कौ, काहू परति पगौना॥ [2]
- श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (10)
(राग विलावाला) श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना। विविध रूप, रंग, अंग-प्रत्यंग, अत्यंत रुचिकर सलोना... [1] अत्यंत विरक्त, शरीर का रंग, पुत्र का तन-मन प्रसन्न। सरस लाड़िली लाल ख्याल कौ, काहु परती पगौना.. [2] - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (10)