झूलत दोऊ नवल हिंडोलैं

Saras Sagara —

Verse 5 of 6

(राग मलार) झूलत दोऊ नवल हिंडोलैं। विमल पुलिन कल कमल कुंज मधि चितवत नैन सलोलैं॥ [1] जोबन जोर झकोरनि देत आलिंगन करत कलोलैं। सरसदासि सुखरासि रहसि नव सुनत मधुर मृदु बोलैं॥ [2] - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (22) (राग मलारा) झूलत दूओ नवल हिंडोलें। कमल कुंज को विमल पुलिन अपनी आँखों से देखेंगे। सरसदासि सुखरसि रहसि नव सुनत मधुर और शीतल बोले। [2] - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (22)
आजु अति राजति नागरी नाहुश्रीबिहारी प्यारी को खिलौना