जय जय श्री ललिता ललित

Shri Lalita Mngala — श्री वंशी अलि

Verse 3 of 5

जय जय निज आनंद लड़ावनि लाड़ली। छिन छिन मुष अवलोक मत्त अति चाड़िली॥ [1] मृदु मुसिकान बिकान भुलावति मोहिनी। हंसी हेरनि लड़िकाय चपल दृग जोहिनी॥ [2] दृग सोहनी बस मोहनी कटि कुँवरि छवि नित झेलहीं। पीवत पिवावत राधिका रस नेह ग्रंथनि मेलिहीं॥ [3] - श्री वंशी अलि, श्री ललिता मंगल (1) जय जय निज आनंद लाडवानी लाडली। छिन-छिन मुश अवलोक माता बहुत चढ़ती है..[1] शीतल संगीत मोहिनी की माया भुला देता है। हंसि हरनि लड़ैकाय, चपल औषधि जोहिनि.. [2] औषधि सोहनी, बस मोहिनी, कटि कुंवारी छवि, नीता जहलेहिं। पिवत पिवत राधिका रस नेह ग्रंथनि मेलिहिं।।[3] - श्री वंशी अली, श्री ललिता मंगल (1)
जय जय श्री ललिता ललितजय जय श्री ललिता ललित