श्री वृंदावन चंद बिहारी

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 15 of 35

(राग देवगंधार) मेरी राधा प्रिय आधार। गौर - स्याम अभिराम छबीले सोभा अपरंपार॥ [1] सखिनि सहित निजु कुंजमहल में वृंदाविपिन बिहार। सुंदर वर अति रसिक-सिरोमनि रूप निरखि बलिहार॥ [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (34) (राग देवगंधार) मेरी राधा प्रिया अधर। गौर - स्याम अभिराम छबीले सोभा अपर्णापर..[1] सहपत्नी सहित निजु कुंजमहल नर वृंदाविपिन बिहार। सुन्दर वर, अति गुलाबी मस्तक, निराकार त्याग.. [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी के वचन, शृंगार के पद (34)
स्यामा नित्य बिहार बनीमैं जानी मैं जानी लडैती जू