राधा नाम मुकट मनि मंत्र
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 17 of 35
(राग भैरौं)
राधा नाम मुकट मनि मंत्र।
आगम वेद पुरान अगोचर
ढूढे त्रिभवन तंत्र॥ [1]
मोहन मन कों वसीकरन है
भूलें हूँ नहीं अंत्र।
रसिक रूप गावति निसिवासर
हरषि बजावति जंत्र॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (46)
(राग भैरौं) राधा नाम मुकट मणि मंत्र। आगम वेद पुराण अगोचर धुधे त्रिभवन तंत्र। [1] मोहन मन, भूल जाओ कौन सा वशीकरण है, कोई फर्क नहीं। रसिक रूप गावति निसिवासर हरषि बाजवति जंत्र.. [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के छंद (46)