स्यामा नित्य बिहार बनी

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 18 of 35

(राग विहागरौ) रंगीले दोउ कुंज महल में राजैं। करत केलि रस झेली निरंतर किंकिनी नूपुर बाजैं॥ [1] परिरंभन आलिंगन चुंबन अंग अंग सरस समाजैं। सदा समीप रसिक हरिदासी रूप निरखि छबि छाजैं॥ [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (458) (राग विहागरौ) रंगीले दोऊ कुंज महल मैं राजाइन। करत केलि रस झेलि निकृति किंकिनी नूपुर बाजैन।।[1] परिर्नभन अलिंगन चुनबन अंग अंग सरस समाजैन। गुलाबी हरिदासी रूप सदैव मेरे समीप रहे। [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (458)
राधा नाम मुकट मनि मंत्रमैं जानी मैं जानी लडैती जू