मैं जानी मैं जानी लडैती जू
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 19 of 35
रस मत्त बिहारिनि प्यारी है।
नेंक लखें बस भये लाडिले, अद्भुत रूप उज्यारी है॥ [1]
उमग्यौ रंग सरोवर हिय में, मृदु मुसकनि कछु न्यारी है।
श्रीहरिदासी के हित विहरत, जीवनि प्रान हमारी है॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (69)
रस मत्त बिहारिणी प्यारी है। लाखों लोगों की आंखें बस भयभीत हो जाती हैं, उनका रूप अद्भुत उज्ज्वल है.. [1] यह आदमी रंगों की एक सुंदर झील है, इसकी कोमल नाक और आँखें अद्वितीय हैं। श्री हरिदासी का हित विहार, जीवनी हमारा जीवन है.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (69)