आजु सखी आये मेह सुहाये
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 3 of 35
जै राधे मेरी प्रान अधार।
अद्भुत रंग रूप रस बरषत महा प्रेम अति सुख कौ सार॥ [1]
सहज सनेही सहज आनंद निधि सहज रसिक प्रीतम उर हार।
श्रीकुंजबिहारिनि ललितकिसोरी छिन छिन बिलसत नित्यबिहार॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (8)
जय राधे मेरे जीवन का आधार है। अद्भुत रंग, रूप, स्वाद, वर्षा, महान प्रेम, अति सुख, क्या है इसका सार.. [1] सहज सनेही सहज आनंद निधि सहज रसिक प्रेतम् उर हर। श्री कुंजबिहारिणी ललिताकीसोरी छिन छिन बिलासत नित्यबिहार.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (8)