श्री वृंदावन चंद बिहारी

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 22 of 35

(राग देवगंधार) श्री वृंदावन चंद बिहारी। अद्भुत ललित माधुरी सोहै, को सरि करै तिहारी॥ [1] प्रानप्रिया स्यामा सुंदरि अति, इकटक रहे निहारी। नव निकुंज निधिवन कौ, दृढ़पन रसिक रूप बलिहारी॥ [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (39) (राग देवगंधार) श्री वृन्दावन चंद बिहारी। अद्भुत ललित माधुरी सोहाई, को सरि करै तिहारी।।[1] प्रिय श्यामा सुंदरी अति, इतक रहे निहारी। नव निकुंज निधिवन कौ, दत्तपान रसिक रूप बलिहारी।।[2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के छंद (39)
मैं जानी मैं जानी लडैती जूमैं जानी मैं जानी लडैती जू