मैं जानी मैं जानी लडैती जू
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 23 of 35
श्रीकुंजबिहारिनि ललित लाडिली,
अद्भुत रूप रसाला। [1]
हँसनि लसनि मुसकनि रस बरसत,
लालै करति निहाला॥ [2]
उमँगि उमँगि दोउ मदन लडावत,
दोउ दोउन उरमाला। [3]
श्रीललितकिसोरी के हित विहरत,
जानि महा निजु हाला॥ [4]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (4)
श्रीकुंजबिहारिणी, सुन्दर, अद्भुत सुन्दर। [1]. [3] श्री ललित किशोरी के हित विहरत, जनि मह निजु हला.. [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस की वाणी (4)