स्यामा नित्य बिहार बनी

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 25 of 35

(राग विहागरौ) स्यामा नित्य बिहार बनी। नित्य बना श्री कुंजबिहारी, ताके रसहि सनी॥ [1] अंग अंग आभूषण अभरन, वारौं नील मनी। रसिक रूप हरिदासि कृपा बल, बिपुल बिनोद भनी॥ [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (673) (राग विहागरौ) श्यामा नित्य बिहार बानी। नित्य बाण श्री कुंजबिहारी, ले रसहिं सानि।।[1] शरीर का प्रत्येक अंग नीले रत्नों सहित आभूषणों से परिपूर्ण है। रसिक रूप हरिदासी कृपा बल, बिपुल बिनोद भानी.. [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस छंद (673)
मैं जानी मैं जानी लडैती जूस्यामा तू करुना को सागर