स्यामा तू करुना को सागर

Shringar Ras Ke Pada —

Verse 26 of 35

(राग सारंग) स्यामा तू करुना को सागर। तुव दुति निरखै कुंजबिहारी, परम रसिक वर नागर॥ [1] ललित बदन दृग सोभा सुंदरि, अद्भुत रूप उजागर। गोरे तन सुख सुरंग चूनरी, निरखि रूप गुन पागर॥ [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (186) (राग सारंग) श्यामा, तू करुणा का सागर है। तुव दुति निरखई कुंजबिहारी, परम रसिक वर नगर।।[1] सुन्दर शरीर और मनमोहक सौंदर्य, अद्भुत सौन्दर्य उजागर। श्वेत देह, सुख, सुरंग, चुनरी, भोला रूप, गुन पगार.. [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस छंद (186)
स्यामा नित्य बिहार बनीमैं जानी मैं जानी लडैती जू