महा रूप रस माधुरी, दंपति केलि विलास
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 29 of 35
कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल।
रंग भरे मुसिकात दोऊ, उर चंपे की माल॥
- श्री रूप सखी, श्रिंगार रस के दोहे (9)
कुंजबिहारी लाड़िली, कुंजबिहारी लाल। रंग-बिरंगे संगीत के युगल, उर छनपे की माला... - श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (9)