आजु सखी आये मेह सुहाये
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 5 of 35
सरि कौन करै मेरी प्यारी की।
जाको रूप रूप कों मोहै पालक न लगै बिहारी की॥ [1]
अद्भुत प्रीति देखैं बनि आवै तन मन अति हितकारी की।
श्रीकुंजबिहारिनि ललित लाडिली जीवनि प्रान हमारी की॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (56)
मेरे प्रिय के लिए सब कुछ कौन करेगा? हर रूप में जाओ, कौन बिहारी आंख नहीं मारता? [1] बानी अवाई का अद्भुत प्रेम देखा, जो तन और मन के लिए बहुत लाभकारी है। श्री कुंजबिहारिणी ललित लाडिली जीवनी प्राण हमारी की.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस पद (56)