मैं जानी मैं जानी लडैती जू
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 6 of 35
बिहारिनि लाडिली रस माती।
अति आनन्द भरी सुखरासी, मंद मंद मुसकाती॥ [1]
अद्भुत रूप कहत नहिं आवै, प्रीतम सँग किलकाती।
ललितकेलि तनमन मिलि विहरत, छिन छिन प्रति हुलसाती॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (67)
बिहारिणी लाड़िली रस माटी। अति प्रसन्नता, अति प्रसन्नता, मंद मुस्कान। [1] अद्भुत सौंदर्य, बयां नहीं कर सकता, हंसता हूं प्रियतम के साथ। ललितकेलि तनमन मिलि विहारत, छिन छिन प्रति हुलासति.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (67)