होरी खेलैं श्यामा श्याम
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 8 of 35
(राग रामकली)
होरी खेलैं श्यामा-श्याम।
दृग रंग भरि भृकुटी पिचकैं चलि मृदु मुसिकानि बाम॥ [1]
बाजत ताल मृदंग अंग संग वृन्दावन छवि धाम।
रूप सखी न्यौछावरि कीनौं कोटिन रति जुत काम॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (808)
(राग रामकली) चलो होरी-श्याम-श्याम खेलें। सांवला रंग, भारी भौहें, पिचकन चली, मृदु संगीत बम.. [1] बाजत ताल मृदंग अंग सहित वृन्दावन छवि धाम। रूप सखी कितना त्याग करती है, कितना प्रेम करती है और कितना काम करती है.. [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस छंद (808)