मैं जानी मैं जानी लडैती जू
Shringar Ras Ke Pada —
Verse 9 of 35
लडैती आनंद निधि सुखरासी।
महा प्रेम भरी सहज छबीली, सदा ही प्रीतम पासी॥ [1]
अद्भुत रूप रसीली भामिनि, बँधे मधुर मृदु हासी।
श्रीललितकिसोरी रसिक सिरोमनि, विलसत केलि विलासी॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (2)
लड़ैति आनंद निधि सुखरासी। महान प्रेम, अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, सदैव प्रिय.. [1] अद्भुत रूप, गुलाबी पत्नी, टाई से बंधी मधुर मुस्कान। श्री ललित किशोरी रसिक सिरोमनि, विलासत केलि विलासी.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस पद (2)