नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 10 of 102

बिछुरन रहित सुबस्तु है, सुनहि रसिक चित्त लाई। श्री स्वामी हरिदास जू, प्रगट सुनाई आई॥ - श्री ललित किशोरी, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धान्त की साखी (173) वह बिना किसी अलगाव के, सुनहरी और रोमांटिक सोच वाली एक खूबसूरत चीज़ है। श्री स्वामी हरिदास जू, प्रगट सुनै ऐ.. - श्री ललित किशोरी, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत की साखी (173)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई