सिद्धान्त की साखी

Siddhant Ki Sakhi

श्री ललित किशोरी देव · 102 verses · Braj

  1. 1. नामी नाम न भावई
  2. 2. नामी नाम न भावई
  3. 3. अलकैं छूटीं वदन पर, श्रम जल कन अभिराम।
  4. 4. नामी नाम न भावई
  5. 5. नामी नाम न भावई
  6. 6. नामी नाम न भावई
  7. 7. बैकुंठ महा बैकुंठ तै, गोलोक परै है धाम।
  8. 8. नामी नाम न भावई
  9. 9. नामी नाम न भावई
  10. 10. नामी नाम न भावई
  11. 11. नामी नाम न भावई
  12. 12. नामी नाम न भावई
  13. 13. नामी नाम न भावई
  14. 14. नामी नाम न भावई
  15. 15. चतुरदास चित चौंप सों, करि वृंन्दावन बास।
  16. 16. नामी नाम न भावई
  17. 17. नामी नाम न भावई
  18. 18. नामी नाम न भावई
  19. 19. नामी नाम न भावई
  20. 20. नामी नाम न भावई
  21. 21. जा सुख नैना सुख ढके, सो सुख कह्यो न जाइ।
  22. 22. जब जागै तब प्रिया भजे, कै सोवै पांव पसारि।
  23. 23. जब प्रिया मानैं अपनपौ, तब लाल रहें आधीन।
  24. 24. नामी नाम न भावई
  25. 25. नामी नाम न भावई
  26. 26. नामी नाम न भावई
  27. 27. नामी नाम न भावई
  28. 28. कुंज बिहारीनि बाल कों, सेवें हित सों नित्त।
  29. 29. नामी नाम न भावई
  30. 30. कुंज बिहारिनि लाडिली, जाकौ अपनो कीन।
  31. 31. नामी नाम न भावई
  32. 32. कुटिल लम्ब कल चीकने, मिहीं सघन तर कान।
  33. 33. लड़ैती कहै लड़ैतीय कहावै, ललित लड़ैती मो मन भावै।
  34. 34. ललितमोहिनी कृपा करी, निरखे स्यामास्याम।
  35. 35. नामी नाम न भावई
  36. 36. नामी नाम न भावई
  37. 37. नामी नाम न भावई
  38. 38. निहचै भजै बिहार कों, और न जानैं देव।
  39. 39. निजु प्रिय कीनी अपनपौ, तन मन रही समाई।
  40. 40. निश्चय तन मन प्रेम सों, सुमिरि बिहारिनि बाल।
  41. 41. नामी नाम न भावई
  42. 42. नामी नाम न भावई
  43. 43. प्राप्ति में संसै नहीं, तन मन वचननि एक।
  44. 44. प्रेम-सार, सुख-सार है, रूप-सार रस-सार।
  45. 45. नामी नाम न भावई
  46. 46. राग द्वेष हमरे नहीं
  47. 47. राग-द्वेष हमरे नहीं
  48. 48. नामी नाम न भावई
  49. 49. नामी नाम न भावई
  50. 50. रोम रोम आनंद भयो, छिनु छिनु होत हुलास।
  51. 51. नामी नाम न भावई
  52. 52. नामी नाम न भावई
  53. 53. सहज स्नेही श्याम के, बन बसि अनत न जाँइ।
  54. 54. नामी नाम न भावई
  55. 55. नामी नाम न भावई
  56. 56. सेवैं नित्य सरुप कौं, और वृन्दावन चंद।
  57. 57. नामी नाम न भावई
  58. 58. श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ।
  59. 59. नामी नाम न भावई
  60. 60. नामी नाम न भावई
  61. 61. नामी नाम न भावई
  62. 62. नामी नाम न भावई
  63. 63. श्रीस्वामी हरिदास भज, छाँडि सकल जंजार।
  64. 64. श्रीस्वामी हरिदास भजि, सिद्ध होइ सब काम।
  65. 65. नामी नाम न भावई
  66. 66. नामी नाम न भावई
  67. 67. श्रुति स्मृति बिचारत तत्व सब, पार न पावे कोई।
  68. 68. सो सुख वृन्दाविपिन है, मूल आदिद्रुम जैस।
  69. 69. सोई जगत में जानि, जाकौं मैं मेरी लगी।
  70. 70. नामी नाम न भावई
  71. 71. सुख की संधि समझे बिना, परे महा दुख द्वंद।
  72. 72. सुरति समानी रूप में, रूप सुरति के माँहि।
  73. 73. नामी नाम न भावई
  74. 74. नामी नाम न भावई
  75. 75. नामी नाम न भावई
  76. 76. नामी नाम न भावई
  77. 77. लाख बार हरि हरि कहो एक बार हरिदास
  78. 78. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  79. 79. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  80. 80. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  81. 81. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  82. 82. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  83. 83. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  84. 84. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  85. 85. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  86. 86. साखी के दोहे, सिद्धांत (22) श्रीधाम वृन्दावन की दिव्य भूमि ब
  87. 87. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  88. 88. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  89. 89. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  90. 90. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  91. 91. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  92. 92. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  93. 93. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  94. 94. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  95. 95. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  96. 96. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  97. 97. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  98. 98. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  99. 99. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  100. 100. श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
  101. 101. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  102. 102. कुंदन रतन भूमि लता तरु रही झूमि