नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 16 of 102

देखै तौ निजु केली कौं, और न देखै आन। जैसे जल में मीन है, तैसे रसिक सुजान॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (268) देखो कौन तुम्हारा है और कौन तुम्हारा है। जैसे जल में जल है, वैसे ही रसिक सुजान.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत साखी (268)
चतुरदास चित चौंप सों, करि वृंन्दावन बास।नामी नाम न भावई