चतुरदास चित चौंप सों, करि वृंन्दावन बास।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 15 of 102

चतुरदास चित चौंप सों, करि वृंन्दावन बास। काम केलि निरखत रहे, और न दूजी आस॥ - श्री चतुर दास, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (1) चतुरदास चित चॉम्प सों, कारी वृन्दावन बास। केवल काम के लिए अलिखित रहो, और कुछ मत करो.. - श्री चतुर दास, सिद्धांत के मित्र श्री चतुर दास जी के शब्द (1)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई