नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 18 of 102
हम हमरी है लाडली, कहें सुनें चितलाई।
कुंज केली निरखे सदा, महा परम सुख पाइ॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (275)
हम अपनी बेटी हैं, हम आपकी बात क्यों मानें? कुंज केलि निराखे सदा, मह परम सुख पै.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (275)