नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 19 of 102

हमरी बात भली बनी, भई लडैती प्रान। ताही तें अति सुख भयो, मिली सु रसिक सुजान॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (279) हम जो कहते हैं वह अच्छा है भाई, मेरे प्रिय योद्धा। ताहि तेन अति सुख भयो, मिलि सु रसिक सुजान.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की सखी (279)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई