नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 31 of 102

कुंवरी लडैती लाडिली, लाड लडी सुकुमार। अँग सँग दैनी केली रस, महा प्रेम सुख सार॥ - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (276) खूब लड़े कुमारी, खूब लड़े सुकुमार। अंग संग दैनि केलि रस, महा प्रेम सुख सार.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (276)
कुंज बिहारिनि लाडिली, जाकौ अपनो कीन।कुटिल लम्ब कल चीकने, मिहीं सघन तर कान।