कुंज बिहारिनि लाडिली, जाकौ अपनो कीन।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 30 of 102

कुंज बिहारिनि लाडिली, जाकौ अपनो कीन। ताकौ कर छाँडे नहीं, महा सु रसिक प्रवीन॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (269) कुंज बिहारिणी लाडिली, अपने परिवार में जायें? देखकर मत खोजना, मैं बहुत रोमांटिक हूं प्रवीण.. - श्री ललित किशोरी देव, आवाज श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत की सखी (269)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई