लड़ैती कहै लड़ैतीय कहावै, ललित लड़ैती मो मन भावै।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 33 of 102

लड़ैती कहै लड़ैतीय कहावै, ललित लड़ैती मो मन भावै। अंग संग केलि लड़ैती देखै, छिन छिन बाढ़े सुख आलेखे॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (147) कहां झगड़ा है, कहां झगड़ा है, ललित, वहां झगड़ा लगता है। बस शरीर से लड़ाई देखो, धीरे-धीरे बढ़ती खुशी पढ़ो.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (147)
कुटिल लम्ब कल चीकने, मिहीं सघन तर कान।ललितमोहिनी कृपा करी, निरखे स्यामास्याम।