ललितमोहिनी कृपा करी, निरखे स्यामास्याम।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 34 of 102

ललितमोहिनी कृपा करी, निरखे स्यामास्याम। चतुरदास सब छाँड़िके, भजि वृन्दावन धाम॥ - श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (13) ललितमोहिनी कृपा करो निरख श्यामस्याम। चतुरदास सब छंदइके, भजी वृन्दावन धाम.. - श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सखा सिद्धांत (13)
लड़ैती कहै लड़ैतीय कहावै, ललित लड़ैती मो मन भावै।नामी नाम न भावई