नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 48 of 102
रहनी कहनी एक सी, जयौं की त्यौं जो होइ।
सोई तो वस्तु पाई है, जागो रहौ कि सोइ॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (307)
जिंदगी की कहानी तो वही है, जो भी हुआ। सोई तो वास्तु पै है, जागो राहु की सोई.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (307)