नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 49 of 102
रसिक सिरोमनी लाड़िली, सो हमरे अंग संग।
कुंज महल राजैं सदा, निरखै केलि अभंग॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (262)
कामुक बिना सिर वाली महिला, तो हमसे जुड़ें। कुंज महल राजैन सदा, निरखई केलि अभंग.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (262)