नामी नाम न भावई
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 55 of 102
सेवै नित्य बिहार कों, और न जानै कोइ।
कुंजबिहारिनि बाल ने, तन मन लये समोइ॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (303)
बिहार में सेवा नीति कौन जानता है, कौन जानता है? कुंजबिहारिणी पूरे मन और आत्मा से बाल समोई को लेकर आईं.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (303)