नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 54 of 102

सरन गहौ श्री हरिदास की, माया छुए न छाँह। कुंजबिहारिनि लाड़िली, बेगि गहेंगी बाँह॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (260) मैं श्री हरिदास से प्रार्थना करता हूँ कि माया उन्हें स्पर्श न करें। कुंजबिहारिणी लड़ैली, बेगी गाहेंगी बान्ह.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (260)
सहज स्नेही श्याम के, बन बसि अनत न जाँइ।नामी नाम न भावई