नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 57 of 102

श्री कुंजबिहारिनी लाडिली, श्री स्वामी हरिदास। ए वे वे ए एक हैं विलसत प्रेम विलास॥ - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (210) श्री कुंजबिहारिणी लाडिली, श्री स्वामी हरिदास। यह वह है, यह विलासिता है, प्रेम है, विलासिता है.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की आवाज, सिद्धांत की साखी (210)
सेवैं नित्य सरुप कौं, और वृन्दावन चंद।श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ।