श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ।

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 58 of 102

श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ। औरन के औगुन कहा देखौ, अपनी ओर लजौ॥ - श्री चतुर दास, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (9) श्री स्वामी हरिदास भजौ मन, श्री हरिदास भजौ। देखो हमारे, तुम्हारे या लाजौ के औगुन कहाँ हैं.. - श्री चतुर दास, सिद्धांत के मित्र श्री चतुर दास जी के शब्द (9)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई