सोई जगत में जानि, जाकौं मैं मेरी लगी।
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 69 of 102
सोई जगत में जानि, जाकौं मैं मेरी लगी।
रसिकनि यह बानि, मैं मेरी करि लाड़िली॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (400)
मैं इस दुनिया में सो रहा हूं, मुझे पता है कि मेरा कौन है। रसिकनि दिस बानी, मैं अपनी करि लड़ैली.. - श्री ललित किशोरी देव, स्वर श्री ललित किशोरी देव जू, सिद्धांत साखी (400)