नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 73 of 102

तन छूटै तो परम सुख, रहै तो भजन अपार। श्रीकुंजबिहारिनी लाड़िली, जीवनि प्रान आधार॥ - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (193) शरीर छूट जाए तो परम सुख है, रह जाए तो अपार भक्ति है। श्री कुंजबिहारिणी संग्राम, जीवनी, जीवन आधार.. - श्री ललित किशोर देव, श्री ललित किशोर देव जू की आवाज, सिद्धांत के मित्र (193)
सुरति समानी रूप में, रूप सुरति के माँहि।नामी नाम न भावई