नामी नाम न भावई

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 74 of 102

तनु की मनु की बचन की, करी अविद्या दूरि। कुंजबिहारिनी लाडिली, भरयौ प्रेम भरपूरि॥ - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (592) मनु को तनु के वचन के कारण, अज्ञान का नाश करो। कुंजबिहारिणी लाडिली, भरयौ प्रेम भरपुरी.. - श्री ललितकिशोर देव, श्री ललितकिशोर देव जू की आवाज, सिद्धांत की सखी (592) हमारी प्रिय कुंज-बिहारिणी श्री राधिका जू ने हमारे हृदयों को परम प्रेम से भरकर शरीर, मन और वाणी के सभी अज्ञान को भयभीत कर दिया है।
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई