श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 81 of 102
करुना सिंधु दयाल हो, बाँके विरदनि नाथ।
कब कृपा कर राखि हो, निसि दिन अपने साथ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (51)
करुणा सिन्धु, दयालु हो, धन्य हो। जब भी आप चाहें, हर दिन राखी अपने पास रखें.. - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहे (51)