श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव
Verse 80 of 102
जाँचें और न देव कौ, नहीं तीरथ वृत आस।
महली श्री हरिदास के, चरण कमल विश्वास॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (61)
न जंचेन न देव कौ, न तीरथ वृत अस। श्री हरिदास के महल, विश्वास के चरण कमल.. - दोहे, श्री रूप साखी के सिद्धांत (61)