श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 96 of 102

श्री वृंदावन दंपति, जो चाहै रस रीति। श्री स्वामी हरिदास के, चरननि सों कर प्रीति॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (49) श्री वृन्दावन युगल, जैसी आपकी रुचि। श्री स्वामी हरिदास के दोहे, चरणानी पुत्र कर प्रीति.. - श्री रूप सखी, सिद्धांत (49)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि