लड़ैती मेरी प्रानजीवन धन प्यारी।
Siddhanta Pada —
Verse 28 of 63
लड़ैती मेरी प्रानजीवन धन प्यारी।
तनहुँ लड़ैती मनहु लड़ैती
छिन हूँ होत न न्यारी॥ [1]
कुंज महल में सदाई राजैं
लालन के उरहारी।
श्री हरिदासी ललितकिसोरी
या रस की अधिकारी॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (144)
संघर्ष ही मेरा जीवन और धन है, मेरे प्रिय। सनातन राजा का जन्म कुंज महल में हुआ था। श्री हरिदासी ललित किशोरी या रस अधिकारी.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत श्लोक (144)