लडैती जू को महल महा सुखरासी।
Siddhanta Pada —
Verse 27 of 63
लडैती जू को महल महा सुखरासी।
जिहि विधि चाहै प्रिया आपु को तैसी केलि विलासी॥ (1)
छिन छिन प्रीति नई नई बरषत तन मन होत हुलासी।
श्रीललित किसोरी रंग बड़ावती सदा सर्वदा पासी॥ (2)
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (69)
लड़ैती जू को महल मह सुखारसी। जो भी विधि चाहो प्रिय अपु, यह विलासिता है.. (1) थोड़ा-थोड़ा प्यार करो, न बरसाओ, तन-मन सुंदर बनाओ। श्री ललित किशोरी रंग बदावती सदा सर्वदा पासी.. (2) - श्री ललित किशोरी देव, शब्द, श्री ललित किशोरी देव चिड़ियाघर के सिद्धांत (69)